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फनी विडियोज से बहुत बड़ी है TikTok बैन की असल वजह


भारत में यूजर्स के ऐप स्टोर से टिकटॉक ऐप गायब हो गया है और ऐसा सरकार के आदेश के बाद हुआ है। सरकार ने गूगल और ऐपल से ऐप को ब्लॉक करने को कहा और iOS के ऐपस्टोर और एंड्रॉयड के प्लेस्टोर से ऐप डिलीट कर दिया गया। सरकार ने 59 चाइनीज ऐप्स को बैन किया है, जिनमें TikTok भी शामिल है। ऐसा देश की अखंडता और प्रभुता बनाए रखने के लिए किया गया है और कहा गया है कि यह ऐप यूजर्स की प्रिवेसी के लिए भी खतरा थे और दूसरे देशों में डेटा भेज रहे थे। टिकटॉक ऐप बैन करने की कई वजहे हैं और यह मामला इतना छोटा नहीं है। 
13 से 24 साल के हैं ज़्यादातर ऐप यूजर्स
टिकटॉक के सबसे ज़्यादा यूजर्स युवा और किशोर हैं। फरवरी तक भारत में इसके 24 करोड़ यूजर्स थे, जिनमें से आधे से ज़्यादा की उम्र 13 से 24 साल के बीच है। ऐप पर दिखने वाले विडियोज 13 से 16 साल के बच्चों पर क्या असर डालते हैं या उनके देखने लायक हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करना ज़रूरी हो जाता है। ऐप 18 या 16 साल तक के यूजर्स के लिए होता तो ऐप यूज करना या न करना यूजर्स के विवेक पर छोड़ा जा सकता था।


कंटेंट के नाम पर सॉफ्ट पॉर्न
टिकटॉक ऐप पर बीच में आने वाले ‘for you’ सेक्शन में उन यूजर्स के विडियोज दिखते हैं, जिनके प्रोफ़ाइल पब्लिक हैं। ऐसा पाया गया कि इस फीड में वे विडियोज ज़्यादा फीचर होते हैं जो सेक्सुअल बिहेवियर दर्शाते हैं। ऐप पर डबल मीनिंग डायलॉग्स और गालियों से भरे विडियोज की भरमार है। इसपर अश्लील इशारे करते और भद्दे विडियोज बनाते हर उम्र के यूजर्स मिल जाएंगे। ध्यान दें कि यह ऐप 18+ नहीं बल्कि 13+ है, ऐसे में कई विडियोज कम उम्र के यूजर्स के देखने लायक नहीं होते।
हिंसक और चैलेंज विडियोज
टिकटॉक ऐप पर हैशटैग के साथ अलग-अलग चैलेंज यूजर्स को मिलते रहते हैं, जिनमें से किसी में म्यूजिक पर डांस स्टेप्स करना तो वहीं किसी में डायलॉग पर लिपसिंक करना होता है। ऐप पर खुदको नुकसान और चोट पहुंचाकर विडियो बनाने जैसे चैलेंज भी देखने को मिले जिसके बाद जरूरी कदम उठाए गए। कम उम्र की यूजर्स के विडियोज पर भद्दे और यौन इच्छा जाहिर करने वाले कॉमेंट्स भी देखने को मिले, जो ऐप में पब्लिक अकाउंट होने पर कोई भी कर सकता है।
पहली बार नहीं लगा बैन
ऐसा नहीं है कि टिकटॉक पर पहली बार बैन लगा है। इससे पहले अश्लीलता फैलाने और बच्चों पर बुरा असर डालने के चलते इंडोनेशिया और बांग्लादेश ने भी इस ऐप को बैन किया था। यूएस में भी यंग यूजर्स के विडियोज पर भद्दे कॉमेंट्स न रोक पाने के चलते ऐप को आलोचना का सामना करना पड़ा था। भारत में कोर्ट में सुनवाई के बीच टिकटॉक ने 60 लाख अश्लील विडियोज प्लैटफॉर्म से हटाए लेकिन कंटेंट को फिल्टर करने का कोई एल्गोरिदम ऐप डिवेलपर्स के पास नहीं है।
ऐप के पास बड़ा यूजरबेस है, जिसपर बड़ी तादाद कम उम्र वालों की है, ऐसे में कंटेंट पर कंट्रोल न होना कमजोरी है। ऐप पर यूजर्स को क्या दिखेगा, इसे लेकर टिकटॉक की कोई जवाबदेही न होने के चलते कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया। जबकि फेसबुक और वॉट्सऐप जैसे ग्लोबल ऐप्स ने यूजर्स को बेहतर स्पेस देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं और ऐसा ज़रूरी है।
टिकटॉक के मामले में ऐप पर क्या आएगा इसकी जिम्मेदार ऐक्शन डिवेलपर्स नहीं ले पा रहे इसलिए कार्रवाई ज़रूरी हो जाती है। इसके बावजूद यूजर्स ऐप को यूज कर सकते हैं और इसके इस्तेमाल पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। संभव है यह बैन भी हटा लिया जाए लेकिन यूजर के तौर पर अपने लिए क्या बेहतर है यह समझना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी समझना है कि 13 से 18 साल तक के किशोरों को किस तरह का कंटेंट परोसा जा रहा है और वे उससे कैसे प्रभावित हो सकते हैं।

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