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मैडम, प्लीज रेटिंग कर दीजिएगा!

स्नेहा भूल चुकी है कि अभी वर्क फ्रॉम होम चल रहा है और उसे बॉस के मेल का जवाब देना है। फोन पर उसने बहुत दिन बाद फ़ूड डिलीवरी ऐप खोला है और बस स्क्रॉल करती जा रही है। फ़ूड से लेकर ग्रॉसरी तक घर बैठे मंगाने वाली स्नेहा को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि कभी वाकई घर बैठना पड़ेगा। ये कोरोना वायरस नाम की आफत ऐसी आई है कि एक महीने से ऑफिस जाने का नंबर ही नहीं लगा।

स्नेहा तो बहुत खुश हुई थी, अपने लिए ढेर सारा टाइम होगा, कुछ क्रिएटिव करेगी और कुकिंग में हाथ आजमाएगी। सोचा बेशक बहुत कुछ था लेकिन दिन कब बीते और स्नेहा ने क्या किया, वही जाने। न तो कुकिंग ही आई और न ही कुछ क्रिएटिव करने का टाइम मिला। स्नेहा तो आज छुट्टी लेने के मूड में थी लेकिन बॉस कुछ और ही चाहते हैं। 'ये खड़ूस एक दिन चैन से नहीं रहने देता', बुदबुदाते हुए स्नेहा ने ईमेल पढ़ा लेकिन उसका रिप्लाइ करने से पहले अपना फोन उठा लिया।

फोन में फेसबुक, इंस्टा और व्हाट्सएप अब स्नेहा को बोर करने लगे हैं। वैसे भी वो सोशल मीडिया ऐप्स से ज़्यादा डिलीवरी ऐप्स यूज करती रही है। ऑनलाइन शॉपिंग या ऑर्डर की शौकीन स्नेहा को फ्लैट से लेकर ऑफिस तक पैकेज रिसीव करना बहुत पसंद है। अचानक फोन उठाकर स्नेहा यूं ही नहीं बैठ गई, उसे याद आया, हर पैकेज लाने वाला बस एक बात कहता है, 'मैडम, प्लीज रेटिंग कर दीजिएगा।' इस बात को स्नेहा ने मानो कभी सुना ही नहीं और मजाल है कि कभी डिलीवरी करने वाले को रेटिंग दी हो।

एक-एक नाम और एक-एक ऑर्डर स्क्रॉल कर रही स्नेहा सबको रेटिंग देती जा रही है। सबको फाइव स्टार, बिना नाम या कोई ऑर्डर देखे। उसकी उंगली एक ऑर्डर पर जाकर रुक गई। जब उसने पार्टी दी थी, उसके बर्थडे पर एक डिलीवरी बॉय पिज़्ज़ा लाया था। स्नेहा को उसकी कही बात याद रह गई, 'ये मेरी पहली डिलीवरी है मैडम, प्लीज रेटिंग कर दीजिएगा।' वो नया लड़का चेहरे पर लगा केक देखकर ही समझ गया था, एकदम टोककर बोला था, 'अरे मैडम, हैप्पी बड्डे।' स्नेहा तो जवाब में ढंग से मुस्कुराई तक नहीं थी।

कुछ भी सोचने से पहले स्नेहा को लगा कि वह रो पड़ेगी। बर्थडे के दिन लड़के को केक खिलाना तो दूर, रिटर्न गिफ्ट में वह फाइव-स्टार रेटिंग तक नहीं दे पाई। वह कब इतनी बड़ी, इतनी बिजी हो गई, उसे पता भी नहीं चला। आज पहली बार उसने गौर से किसी डिलीवरी बॉय का नाम पढ़ा, रचित सोनी। पता नहीं क्यों, कैसे, सामने दिख रहे कॉल बटन पर उसने अपनी उंगली रख दी।

हेलो!

हेलो, रचित से बात हो रही है?

जी मैडम, आप कौन?

हेलो.. आप कैसे हो रचित?

मैं अच्छा हूं लेकिन आप कौन हैं मैडम?

आप मेरे बर्थडे पर पिज्जा लाए थे न, याद आया, सबसे पहली डिलीवरी।

अरे मैडम आप क्यों फोन किए, कोई प्रॉब्लम है क्या?

नहीं, बस ऐसे ही। आपको रेटिंग दे दी है, फाइव स्टार।

मैडम जी, हम सब डिलीवरी बॉयज का नौकरी चला गया, ये लॉकडाउन हुआ न तभी।

ओह.. अम सॉरी।

कोई बात नहीं मैडम। आपने हमें याद किया, कॉल किया, थैंक्यू।

स्नेहा कुछ कहती, या समझती, उससे पहले उधर से फोन कट गया। शायद कट ही जाना चाहिए था क्योंकि कहने को अब कुछ बचा भी नहीं था। स्नेहा बेकार में इतने फाइव-स्टार उन डिलीवरी बॉयज को दे रही थी, जो अब कम्पनी में थे ही नहीं। उसने फोन किनारे रख दिया। लैपटॉप पर नज़र पड़ी तो अपनी दुनिया में वापस आई। 'मैडम, प्लीज रेटिंग कर दीजिएगा!' उसके दिमाग में किसी बिजली की तरह कौंध गया और उसने बॉस के मेल का रिप्लाइ लिखना शुरू किया… 'Sorry Sir, I failed to get five star rating from our client, because…'

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