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ऐसा कर दिखाओ लड़कियों, रेप रुक न गए तो कहना!

    रेप-बलात्कार-दुराचार जितने भारी शब्द हैं उससे कहीं ज़्यादा वजनी एहसास और अक्षम्य अपराध भी हैं। रेप सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक भी होता है और इसका शिकार बनने वाली या तो मार दी जाती हैं या फिर ज़िन्दगी भर के लिए ‘मर’ जाती हैं। तो कैसे रुक सकते हैं रेप? कौन बचाएगा रेप से? क्या लगता है? समाज-सरकार-पुलिस? नहीं! अब कोई बचाने वाला नहीं है तो खुद कुछ करने का वक़्त आ गया है। कैसे और क्या करना है आइए बताता और समझाता हूं।

खुद करना होगा बचाव
कई कड़े कानून बनने और निर्भया कांड के बाद हुए जरूरी बदलावों के बावजूद रेप थमने का नाम नहीं ले रहे। कई बार तो पुलिस की नाक के नीचे रेप होता है और मुकदमा दर्ज करने की नौबत तक नहीं आती। सरकार किसी की भी हो, रेप की खबरें रोज आती रहती हैं, कुछ ज़्यादा उछलती हैं तो कुछ लोकल थाने में ही दबा दी जाती हैं। रेप लगातार हो रहे हैं और इनसे कोई और नहीं बचाने वाला यह भी स्पष्ट है। ज़रूरी है कि अपना बचाव खुद किया जाए।

खुद को रेप से कैसे बचाएं इसके लिए हमारे देश में अब तक केवल ज्ञान दिया जाता रहा है। कपड़ों से लेकर, लड़कों से दोस्ती और मोबाइल न चलाने जैसी सलाह देकर खुद को बचाने को कहा जाता है क्योंकि यहां लड़कियों के लिए सम्मान का दूसरा पर्याय उनके शरीर को बना दिया गया है। कोई मुझे बता सके ऐसा ज्ञान जो आप 4 महीने, 6 साल, 10 साल की बच्ची को दे सकें जिससे वह रेप से बचे? ज्ञान कोई इलाज नहीं है, खुद के बचाव का मतलब डरना और दबकर रहना नहीं होता, इसे समझना होगा।



डरने की जगह मुकाबला करना होगा
अब तक दिखता है, अगर लड़की की ओर कोई बदनीयत से एक कदम बढ़ाता है तो वह दो कदम पीछे हट जाती है। यही सामने वाले अपराधी को चार कदम आगे बढ़ने की हिम्मत दे देता है। अब करना ये होगा कि सामने वाला एक कदम बढ़ाए तो लड़की दो कदम आगे आकर उसपर हमला करे। ‘खुद को बचाने के दो तरीके हैं, एक भागना और दूसरा मुकाबला करना। जब आप भागते हैं तो पीछा करने वाला खुदको ताकतवर समझ लेता है।’ अब तक भागने से रेप नहीं रुक पाए हैं, तो अब वक्त है मुकाबला करने का।

यहां समस्या ये है कि रेप का शिकार 3-4 महीने की बच्ची से लेकर 80-90 साल तक की बुजुर्ग भी बन रही हैं और रेप करने वालों की भी उम्र अब किसी दायरे में बंद नहीं रह गई है। इस तरह हम हर किसी को खुद को बचाने का तरीका नहीं सिखा सकते और हर किसी को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी नहीं दी जा सकती। ऐसे में जो लड़कियां ऐसे युवा आयु वर्ग में आती हैं जो लड़ सकें, मुकाबला कर सकें, उन्हें ही उदाहरण पेश करने होंगे।
‘बचाओ-बचाओ’ मत चिल्लाना, खुद ही भिड़ जाना
आजतक शायद ही भारत में ऐसा कोई मामला सामने आया हो जहां रेप पीड़िता ने रेपिस्ट की हत्या कर दी हो। अब इसी की ज़रूरत है। रेप करने के बाद रेपिस्ट पकड़ा भी जाए तो पुलिस और कोर्ट की कार्रवाई में ढेर सारा वक़्त लगता है और सुनवाई ठीक से हो यह भी ज़रूरी नहीं। ‘जब रेपिस्ट ऑन दि स्पॉट मरेंगे, तभी लोग रेप करने से डरेंगे।‘ तो लड़कियों जब तुम्हारा सब कुछ तुमसे छीना जा रहा हो तो ‘बचाओ-बचाओ’ मत चिल्लाना, क्योंकि कोई बचाने नहीं आएगा.. खुद ही भिड़ जाना।

जिन लड़कियों को लगता है वे शारीरिक रूप से कमज़ोर हैं और किसी का मुकाबला क्या करेंगी, खुद को आईने में देखिए। आपके पास नाखून, दांत और उंगलियां हैं। कुछ गलत होने का इंतज़ार मत करो, तुरंत अटैक करो। कोई बस में टच करे तो फौरन चिल्लाओ, उसे डांट लगाओ, कोई पीछा करे तो वह गलत कर रहा है, पलटकर उसे ये बताओ। अगर रेप की नौबत भी आए और जान पर बन आए, तो ज़रूरी है रेपिस्ट की आंखों में नाखून घुसाकर पुतलियां निकाल लो, दांत से उसकी नाक काट लो और जितना भी बन पड़े, उसे उसके किए की सज़ा ज़रूर दो।

डर से जीतना ही है उपाय
इसके लिए तुम्हें अपना डर निकाल फेंकना होगा, कोई कितना भी रोके, तुम्हें कमज़ोर कहे, ये बनावटी चेहरा उतार फेंकना होगा। ये कर पाना आसान नहीं लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। अगर कोई तुम्हारा सब कुछ नोच लेने की नीयत रखता है तो तुम्हें भी अपनी रक्षा करने के लिए उसकी जान लेने का हक है, ये हक़ तुम्हें कोई कानून नहीं देता, ये हक़ तुम्हें खुद मिला है क्योंकि तुम्हारे शरीर और मन पर सिर्फ तुम्हारा हक़ है। ‘यकीन मानो, जिस दिन रेप के साथ रेप करने वाले की हत्या और मौत की खबरें आने लगेंगी, हर दरिंदा कांपेगा क्योंकि उसे लड़कियों में दुर्गा नज़र आने लगेगी।

ऊपर लिखी बातें सिर्फ बनावटी नहीं है। जब तक तुमपर बात नहीं आती तुम कुछ नहीं कर सकती। मौका मिले तो डरने की जगह कुछ करके दिखाओ, मरने से बेहतर होगा सामने वाले पर वार करो, उसे चोट पहुंचाओ क्योंकि सिर्फ एक वार भी आने वाली पीढ़ी और बाकी लड़कियों को बहुत ताकत देगा। वरना घर से निकलने से, सड़क पर चलने से और दोस्तों से मिलने से डर लगता रहेगा। ये सच है कि अपराधी हर लड़की को डराना चाहते हैं और जब तक लड़कियां डरती रहीं, रेप नहीं रुक सकते। रेप उसी दिन बंद होंगे, जब अपराधी लड़कियों की ओर देखने भर से खौफ खाएंगे और उन्हें पता होगा, ‘नीयत खराब हुई और लड़कियों को हाथ लगाया, तो मारे जाएंगे।


नवभारतटाइम्स.कॉम पर पूर्व में प्रकाशित, 

https://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/pratibimb/this-is-how-rapes-will-come-to-an-end/

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